तमाशा
असीम त्रिवेदी ने कार्टून
बनाये . असीम गिरफ्तार हुए . पूरा देश हिल गया . ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर
कुठाराघात कदापि बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.’ असीम ने कहा, “मुझे जेल में रखो .मैं
जमानत नहीं लूँगा. जब तक राजद्रोह का अभियोग ही कानून की पुस्तकों से समाप्त नहीं हो जाता मैं जमानत
नहीं लूँगा .” और लोग भी बोले और क्या खूब बोले !महाराष्ट्र के गृह मंत्री पाटिल जी बोले –राजद्रोह का
अभियोग हटा लिया जायेगा .अडवाणी जी भी बोले .सब बोलते रहे .फिर न्यायालय ने जमानत
स्वीकृत कर दी. असीम ने बंधपत्र भरा और
जेल से बहार आ गए .अरे भई, जेल जाने का उद्देश्य पूरा हो गया. अब झूठ-मूठ में परेशानी क्यों झेली जाए .हमें महात्मा
गाँधी थोड़े ही बनना है .
देश के कई प्रबुद्ध चिंतकों ने कहा –राजद्रोह का
अपराध समाप्त कर दिया जाना चाहिए .मैंने सोचा अवश्य हो जाना चाहिए. जब देश के एक
हिस्से को देश से अलग किये जाने की बात कहने पर कोई राजद्रोह का अभियोग नहीं बनता
तो फिर और कैसे बन सकता है .मैंने सोचा कुछ अन्य कृत्य भी अपराध की श्रेणी से
निकाल दिए जाने चाहिए.जैसे अपने विरोधियों की हत्या करना ,दूसरों की सम्पति पर
बलपूर्वक कब्ज़ा,घूस लेना इत्यादि .प्रबुद्ध वर्गों से पूछ लिया जाए तो कुछ और भी
अच्छे सुझाव मिलेंगे .बड़ा लाभ होगा .देश में अपराध घटेंगे ,शांति व्यवस्था सुधर
जायेगी .हम गर्व से अन्य देशों को बता सकेंगे , हम भी तुम्हारे जैसे हैं.तुम्हारे
यहाँ एक आदमी २० को मार सकता है ,तो हमने भी यह छूट दे दी है.
मैंने असीम का इंटरव्यू
देखा.बड़ी प्रसन्नता हुयी. लंबे बाल ,बढ़ी दाढ़ी बिल्कुल वैसे ही जैसे सत्तर-अस्सी के
दशक में छात्रों की हुआ करती थी. लड़के में दम है ,मैंने सोचा . “जब राजा ही नहीं
रहे तो कैसा राजद्रोह.अब राजा प्रजा का सम्बन्ध समाप्त हो चुका है .इस पुरातन युग
की प्रथा को समाप्त किया जाना चाहिए .राजद्रोह का अपराध समाप्त किया जाना चाहिए.”
असीम गुर्राया.बिल्कुल ठीक कह रहा है लड़का,मुझे लगा .फिर खयाल आया ‘राजा न सही
राज्य अथवा राष्ट्र तो हैं .यदि राष्ट्र के हितों के प्रतिकूल कोई कार्य करे
तो.... .’करने दिया जाए .वैसे भी इस देश में राज्य अथवा राष्ट्र की परवाह किसे है
.
मैंने असीम के कार्टून नहीं देखे. देख लेता तो
ठीक ही था ,नहीं देखे तो भी ठीक ही है . ‘इस देश की १२५ करोड़ जनता ही भारत-माता है
. मैंने अपने कार्टूनों में भारत –माता की व्यथा ही उजागर की है .’असीम सबको धमका
रहे थे .मैं यह तो समझ नहीं पाया की १२५ करोड़ ने अपनी व्यथा उन्हें कैसे सुनाई पर
सुनाई जरूर होगी वरना जो १५-२० लाख का प्रतिनिधित्व करते हैं वो चुप क्यों बैठे
रहते .अरे भई !उनका नाम असीम है,वह कुछ भी कर सकते हैं .चाहें तो एक पल में १२५
करोड़ से बात कर लें .वह संविधान का कार्टून बनायें ,राष्ट्रीय प्रतीकों का मजाक
उड़ाएं , शेर मारें आपसे मतलब .वह स्वयं १२५ करोड़ के बराबर हैं . गरीब आदमी की फसल
रोझ चर जाएँ वह बोल नहीं सकता ,मारे तो जेल जाये . उसे जीने की आज़ादी नहीं है .वह
अपना पेड़ काटे तो पर्यावरण नष्ट हो जाता है .लेकिन असीम बुद्धिजीवी हैं ,कार्टून
बनाते हैं वह अन्ना समर्थक हैं ,केजरीवाल समर्थित हैं कुछ भी करें. वह राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान
करें ,संविधान का मजाक उड़ाएं कोई बात नहीं क्यूंकि उन्हें अभिव्यक्ति की आज़ादी का
अधिकार है , उन्हें कुछ भी करने का अधिकार है .
असीम के एक समर्थक ने कहा ,”देश
में बाघों की संख्या कम हो रही है लेकिन इसकी चिंता किसी को नहीं है ,पर शेर के
कार्टून के बारे में लोग बहुत चिंतित हैं .”बिल्कुल सही कहा .अब इसका क्या किया
जाए कि सिंह राष्ट्रीय प्रतीक पर अंकित थे. हमारे पूर्वज अपनी आनेवाली पीढ़ियों के
गुण समझते थे. इसीलिए उन्होंने गणेश को प्रथम वन्दनीय माना . ......वाहन ....चूहा
...अब हो गया प्रतीक ,बनाईये जितने कार्टून बनाने हैं .प्रसन्न होकर बाघों की
चिंता कीजिये,अभिव्यक्ति की आज़ादी की
चिंता कीजिये ....
अब इतनी धमा-चौकड़ी हो और केजरीवाल पिछड़ जाएँ भला
ऐसा कैसे ! केजरीवाल भी मैदान में कूद पड़े . बोले –अगर असीम रिहा नहीं हुआ तो मैं
धरने पर बैठूंगा .वाह ! क्या बात है .दिल्ली की आमरण बैठक अब खत्म हो गयी है . वह
कुडनकुलम भी हो आये हैं . वहाँ वह अत्यंत स्वच्छ छवि वाले डी.एम.के और
एम.डी.एम.के. के साथ बैठे थे . अब मुंबई में बैठेंगे . साथ में कौन होगा ?मेरी सलाह
मानें तो दाऊद भाई को बुलवा लें .
धर्म-निरपेक्ष छवि एकदम चमक जायेगी .राजद्रोह तो समाप्त हो ही रहा है . बस चांदी
ही चांदी है . चाहे कोई संविधान को कुछ करे चाहे संसद को या राष्ट्र को .....अब तो
आज़ादी ही आज़ादी है ....आम के आम गुठलियों के दाम ......
very well written....congratulations...!! :)
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